Powered By Blogger

Sunday, March 28, 2010

"आप के बीना "
क्या सांस लेना और क्या जीना
ये दुनिया के में सभी व्यर्थ  है  आपके  बीना 
क्या  चाँद   और  क्या  तारे  और  ये  पूनम  की   रात 
सब  सुना  सुना  लगता  है  आपके  बीना 
लोग  सात  जन्मो  की  बात  करते  है 
मई  तो  जीने  नहीं  चाहतीे  आप  के  बीना 
क्या  ख़ुशी  और  क्या  गम  
और  कैसे  ये  स्वार्थी  मित्रो  का  संग 
अब दील   नहीं  लगता  आप  के  बीना 
जीने  की  बात  भुल्काओ 
मरने  की  भी कल्पना  नहीं  कर सकते  आपके  बीना 
क्या  ये  बहेते  झरने  और  
क्या  ये  प्रकृति   में  लहेरती  सुंदरता
मुजे  तो  बहुत  ही  सुना  सुना  लगता  है  आप  के  बीना 
मेरे  मरने  के  बाद  एक ीन  जरुर  पछताओंगे
मई  जी  नहीं  सकी आप  के  बीना 
लेकिन  "आप "  भी  तद्पोंगे  पूरी   जिन्दगी  " मेरे  बीना "

3 comments:

The Ankit Desai Blog said...

"आप के बीना "
क्या सांस लेना और क्या जीना

mani gaya ben.......

$hy@m-શૂન્યમનસ્ક said...

આપકે બીના

ખુબ સરસ ....

HUM HAI RAHI PYAAR KE said...

jin log mere blog padhte hai vo meri khushi hai lekin aap sab ke suzav bhi itna hi aavkarya hai , kya pasand aaya kya pasand nahi aaya aage kaisa likhu , blog ke format aur design ka suzav bhi aavkarya hai